Sunday, March 9, 2008

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हमारा सपना पूरा होगा !

सागर विश्वविद्यालय को लेकर हमेशा से ही दिल मैं कुछ ख़ास था ,मैं हर वक्त गौर विश्वविद्यालय मैं पढने के बारे मैं ही सोचा करता था मैंने सोचा था की सागर यू .टी .डी के लिए कुछ नए रूप मैं सहयोग करना है !इसी सोच ने मुझे यह ब्लॉग बनाने के लिए प्रेरित किया !चुकि यह भारत का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है और यंहा पर एक नया ही अनुभव प्राप्त होता है ! डॉ गौर न जो सपना था उन्होंने बड़ी ही सिद्दत से उसे मुकाम तक पहुँचाया है ! अब एक सपना सम्पूर्ण बुंदेलखंड ने देखा है ! सम्पूर्ण बुंदेलखंड की पहल पर अब सागर को केन्द्रिये दर्जे की मांग की जा रही जो लाखों लोगों के दिलों से जुड़ी हुई है ! इस अभियान के तहत जिस प्रकार सम्पूर्ण बुंदेलखंड ने एकता का परिचय दिया बह काबिले तारीफ है !
डॉ गौर के अपना सपूर्ण जीवन हमारे हित के लिया समर्पित कर दिया तो क्या हम चंद पल उनके नाम नही कर सकते ! मेरा और सम्पूर्ण बुंदेलखंड का यह सपना बहुत जल्द ही पूरा होगा और हम सागर की पहचान को डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के नाम पर मजबूत कर पाने मैं सफल हो पाएंगे !
संजय सेन सागर , ब्लोगर ऑफ़ यादों की किताब

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सागर की शान है,गौर विश्वविद्यालय
मैंने जब से होश संभाला है तब ही से सुनते आया हूँ की डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के सागरवासियों पर क्या अहसान है ,डॉ गौर ने हम्हे एक ऐसा अनमोल तोहफा दिया है जो हर जीवन को एक नया प्रकाश देने का प्रयाश करता है ! डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय ने इतने वषों मैं जिस तरह से सागर का नाम सम्पूर्ण विश्व मैं ऊँचा किया है बह काबिले तारीफ है ! और अब डॉ गौर के सपने के बाद अब जरूरत है हमहे अपना सपना पूरा करने की यानि की डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर को केन्द्र्य दर्जा दिलाने की !डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर किसी भी तरह से बिबाद का विषय न होकर ज्ञान का विषय है इशे राजनीती की नजरों से न देखते हुए ज्ञान की नीति बनाकर देखा जन चाहिए फिर देखिये ही इसे कौन केन्द्रया दर्जे से दूर कर सकता है डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर को यह उपाधि बहुत जल्द मिलेगी !
संतोष जैन स्टील ,प्रदेश अध्यक्ष , युवा शक्ति संगठन

Saturday, March 8, 2008

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आज भी पलक जब झपके




आज भी पलक जब झपके
आए सामने तेरा चेहरा
तुम क्या गई हो ज़िंदगी से
हो गया हूँ और भी तनहा
तुम्हारी वो हँसी


अब भी याद आती है
वो पहली मुलाकात
मुस्कान छोड़ जाती है !
तुम्हारी बातों के वाना
दिल में अब तक मचला करते हैं
क्यों दिल की बात न कह सके
अपने आप से शिकायत करते हैं !
बेवफाई का दाग तुम्हे देके
अपने आप को बचाना चाहते हैं
लफ्जों के बानों से हा
ममोहोब्बत इन्तेहा जताना चाहतें हैं !




दीपक जोक की रचना






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करता हूँ में सिर्फ़ तुमसे प्यार




तेरी याद जब आती है

याद आती है तेरी बेवफाई

तुने दिए जो मुझको आंसू

याद आता तेरा वह प्यारा

जो खो गया कहीं दूर

चाह जिसे जान से भी ज्यादा

याद आया न उसको कोई वादा

वो तेरी तस्वीर को मेरा निहारना
पर अब आंखो में सिर्फ़ नफरत उभरना
अब नहीं करता हूँ मैं तुझसे प्यारा
नहीं बन न चाहता हूँ मैं तेरा यारा
पर क्या इसकी इजाज़त देता है मुझे मेरा प्यार ?

करूं में क्या ?

करता हूँ में सिर्फ़ तुमसे प्यार !



दीपक जोक

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Friday, March 7, 2008


जब से देखा तुम्हें इक नशा सा हो गया है मुझे,
न जाने आजकल यह क्या हो गया है मुझे
ह्ल्की सी आहट सुन दिल कह्ता है कि तू आई है
एक अजीब मगर खूबसूरत सा धोखा हो गया है मुझे
न जाने ....
हर फूल में नजर आता ह बस तुम्हारा ही चेहरा
तितलिंयों और भंवरो से शिकवा हो गया है मुझे
न जाने ...
मेरी रातें गुजरती हैं आजकल करवटें बदलते हुए
चांद तारों से ही अब तो वास्ता हो गया है मुझे
न जाने ....
बहुत परेशां था गम ए जिन्दगी से अब तके
तेरे प्यार की आस में होसला हो गया है मुझेन जाने ......

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!गजल !


पोटली उम्मीदो की यू॑ ही उठाये रखिये !

इतनी रखी है थोडी ऒर बनाये रखिये !!

तेज हवाओ मे बुझ ना जाये कही

दिये को, ओट के सहारे रखिये !!

प्यार ने ही कोख से जना है दर्द को !

इसे भी सीने से लगाये रखिये !!

कद से भी बडे ना हो जाये कही !

अपनी हदो मे ही अपने साये रखिये !!

ना आत्मा, ना भाव, पर कविता कहेगे बहाये रखिये !!

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